आज से राहू का राशि परिवर्तन  भारत के लिए युद्ध की आहट! – पं. अजय शर्मा

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 भारत के लिए संयम का समय, आम लोगों पर भी असर डालेगा 
  पुराणों में प्रसंग आता है समुद्र मंथन के समय अंत में अमृत वितरण का आरंभ हुआ था! जिसमें देवता और दैत्य दोनों पंक्ति में बैठे थे! भगवान विष्णु ने अमृत कलश अपने हाथों में उठाया और उसका वितरण शुरू किया। दैत्यों को लगा कि हमारे पास आते-आते अमृत समाप्त हो जाएगा! उनमें से एक दैत्य बहुत चतुर था! वह देवता का छद्म रूप धारण करके देवताओं के बीच बैठ गया और अमृत पान कर लिया! जैसे ही यह बात चंद्र और सूर्य को मालूम पड़ी, उसी समय विष्णु ने उस उस दैत्य का गला काट दिया! परंतु, वह अमृतपान कर चुका था, उसकी मृत्यु संभव नहीं थी। इसलिए उसके सिर वाला भाग भाग केतु और उदर वाला भाग राहू कहलाया।
राहू चांडाल जाति का ग्रह है और तामसी और अराजकता इसके प्रमुख गुण है। राहू राशियों में एक से डेढ़ साल तक निवास करता है और मानव जीवन पर निश्चित रूप से कुछ न कुछ असर जरूर डालता है। राहू का स्वभाव है कि वह शुक्र, शनि, केतु से मित्रता रखता है। जबकि, सूर्य चंद्र और मंगल से उसकी शत्रुता हैं। 23 सितंबर 2020 (बुधवार) से राहू राशि परिवर्तन कर मिथुन से वृषभ में जाएगा। राहू के परिवर्तन से अलग-अलग चंद्र राशि के जातकों पर प्रभाव कुछ न कुछ जरूर पड़ेगा। राहू के ग्रह परिवर्तन से भारत की जन्म कुंडली के हिसाब से भी परिवर्तन होना तय है।
राहू का मिथुन राशि से वृषभ राशि में गोचर होना निश्चित तौर से देश और आमजन पर इसका प्रभाव होगा। इसके परिणाम भी नकारात्मक होंगे, यह सोचना गलत है। इस परिवर्तन के कई सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलेंगे! राशि की अपेक्षा जन्म पत्रिका में ग्रहों की स्थिति भी अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव डालती है! अतः ग्रह परिवर्तन के साथ जन्म पत्रिका का अध्ययन भी आवश्यक है।
भारत पर परिवर्तन का असर
   भारत की जन्म पत्रिका के लग्न में वृषभ राशि का राहू विराजमान है। राहू का वृषभ राशि मे प्रवेश काफी अच्छा है, लेकिन वक्रीय होने से परिणाम में प्रतिकूल असर होता हैं। भारत की जन्म कुंडली मे कालसर्प योग के साथ वर्तमान मे विष योग भी चल रहा है। राहू का प्रवेश होकर उलटी दिशा में इसका चलना जले पर नमक छिड़कने के समान होगा!
आजाद भारत का जन्म 15 अगस्त 1947 को रात्रि 00ः00 बजे दिल्ली में वृषभ लग्न और कर्क राशि में हुआ था। भारत में राहू का मिथुन राशि से वृषभ राशि में प्रवेश भारत के लिए अनुकूल संकेत देता है! भारत की कुंडली में लग्न में वृषभ है, जो कि राहू की मित्र राशि है, लेकिन राहू और केतु के उलटी दिशा में चलने से भारत के चीन और अन्य देशों से संबंधों में और ज्यादा तनाव के संकेत हैं। ये स्थिति प्रतिकूल परिणाम दे सकती है। भारत की कूटनीतिक विजय होने में भी संदेह है। भारत को अपनी वाणी पर भी नियंत्रण रखना होगा, अन्यथा परिस्थिति ज्यादा प्रतिकूल हो सकती है!  – चीन से संबंध : राहू के वृषभ राशि में आने से भारत चीन पर कूटनीतिक प्रहार करेगा! लेकिन, दोनों के बीच तनाव घटने के आसार नहीं हैं। दोनों के मध्य युद्ध के आसार होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ये स्थिति बहुत छोटी हो, पर ऐसी आशंकाओं को नकारा नहीं जा सकता। भारत सरकार को भी जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा ! सरकार के कई निर्णय भी गलत होते दिखाई देंगे। – कोरोना का प्रकोप : भारत की जन्म कुंडली में राहू के राशि परिवर्तन के साथ उसका उलटी दिशा में चलना और अनंत काल सर्पयोग नामक योग होने के साथ ही चंद्र की दशा में शनि की अंतर्दशा का चलना कोरोना के खतरे को और ज्यादा बढ़ाता दिखाई देता है। इस महामारी से एकदम मुक्ति मिलना आसान नहीं हैं। भारत के लिए इस दशा में देश में महामारी का खतरा बढ़ने का खतरा है। काफी प्रयत्न के बाद भी आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हो सकेगी। आने वाले दिनों में संकट ज्यादा गहराएगा। भारत को इस योग के कारण महंगाई, मानसिक और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही मित्र देशों से भी धोखा संभव है। सरकार को अप्रत्याशित घटनाएं, वर्ग संघर्ष जैसी कई प्रकार की अराजक स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। आतंकवादी गतिविधियों, प्राकृतिक हादसों के साथ ही कोरोना के साथ अन्य बीमारियों में भी इजाफा हो सकता है। लेकिन, जुलाई 2021 के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी और देश उत्तरोत्तर प्रगति की और अग्रसर होगा।

परिवर्तन का राशियों पर प्रभाव

– मेष : इस राशि के जातकों को राहू का गोचर कुंडली के दूसरे भाव में होगा। दूसरा भाव धन संबंधी और कुटुंब से जुड़ा होता है, इसलिए राहू का परिणाम अपेक्षाकृत अच्छा नहीं होगा। इससे वाणी में मधुरता नहीं रहेगी। परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों से वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है। व्यवसाय और नौकरीपेशा लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
– वृषभ : राहू इस राशि का मित्र है, इसलिए वृषभ राशि वाले जातकों को इसके प्रवेश से लाभ होने की संभावना है। इस दौरान वृषभ राशि वाले जातकों का भाग्य साथ देगा, परंतु वाणी पर नियंत्रण रखना अत्यंत आवश्यक है।
– मिथुन : राशि मिथुन राशि वालों के लिए राहू का गोचर 12वें भाव में होगा। इस भाव में राहू का गोचर होने से प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। पुराने रोगों का बढ़ना, व्यय बढ़ना, परिजनों से मनमुटाव होना अर्थात उनसे कहीं दूर जाने जैसी स्थितियां हो सकती है।
– कर्क : इस राशि वालों को राहू के प्रभाव से हर कार्य में सफलता मिलने की उम्मीद है। जातकों के पराक्रम में वृद्धि होगी। यह स्थान लाभ भाव का माना जाता है और ग्यारहवें भाव में राहू का होना निश्चित तौर से शुभ माना जाता है।
– सिंह : इस राशि में राहू दसवें भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली का दसवां भाव कर्म भाव होता है, यहां भी राहु अपेक्षाकृत उत्साहित परिणाम देते हैं। इसमें मान, सम्मान, लाभ आदि मिलेगा! परंतु वैवाहिक जीवन में मतभेद हो सकते हैं अतः अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।
– कन्या : राशि के जातकों के लिए राहू का गोचर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। परंतु, राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्तियों के लिए यह भाव अति उत्तम राजनीतिक लाभ देने वाला हो सकता है। उन्हें धन और प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। लेकिन, इसके साथ ही विभिन्न समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
– तुला : राशि वाले लोगों के लिए समय ठीक नहीं है। विशेषकर उन लोगों के लिए जो शराब, मांसाहार, सट्टा, जुंआ आदि का त्याग करना होगा। अन्यथा परिवार और दोस्तों से संबंध खराब हो सकते हैं। भाग्य भरोसे न बैठकर मेहनत पर ध्यान दें।
– वृश्चिक : इस राशि वालों के लिए राहु का गोचर सातवें भाव में होगा। साक्षी भाव अपनी अर्धांगिनी का होता है, इस कारण व्यवसाय मैं सफलता की उम्मीद अपेक्षाकृत काफी कम होगी और पत्नी से मधुर संबंध नहीं रहेंगे। उसमें तनाव पैदा हो सकता है।
– धनु : राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल हो सकता है। शत्रु स्थान में राहू की उपस्थिति से शत्रुओं पर विजय की संभावना बढ़ती है। लेकिन, प्रेम प्रसंग और वैवाहिक जीवन में तनाव उत्पन्न हो सकता है। इस दौरान आपके विश्वासपात्र मित्र धोखा दे सकते हैं, इसलिए सावधानी रखें।
– मकर : राशि वालों के लिए राहू सामान्य परिणाम देगा। पांचवें भाव में राहू के गोचर करने से संतान एवं उससे संबंधित क्षेत्रों में फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, वैवाहिक संबंधों में पहले की अपेक्षा तनाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि, आर्थिक तौर पर मुश्किलें बढ़ सकती है और पीठ पीछे शत्रु परेशानी उत्पन्न करेंगे।
– कुंभ : राशि के लोगों के लिए राहू का गोचर चौथे भाव में शुभ नहीं है। क्योंकि, चौथा भाव संपत्ति सुख और माता का होता है, इसलिए कोई भी सरकारी काम वाद-विवाद या भूमि संबंधी विवाद में नुकसान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस दौरान वाणी पर संयम रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा नुकसान हो सकता है।
– मीन : इस राशि के जातकों के लिए राहू का भ्रमण सामान्य रह सकता है। तीसरे भाव में राहू के होने से आप बेहतर ढंग से कार्य कर सकते हैं एवं शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। परंतु, पराक्रम भाव में राहू का गोचर होने से कुटुंब और सगे संबंधियों, भाइयों, रिश्तेदारों से अनबन होने की आशंका है।
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पंडित अजय शर्मा 
(कुंडली विशेषज्ञ) 
संपर्क : 9893066604 
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