शनि का वक्री होना परेशानियों में  वृद्धि का संकेत, जुलाई से होगी राहत! -ज्योतिष पं. अजय शर्मा

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 मई माह में दो ग्रह अपनी राशि परिवर्तन करेंगे, जिसमें शुक्र ग्रह का परिवर्तन हो चुका है। वह अपनी राशि वृषभ में आ चुकी है। वहीं 26 मई को बुध वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। 23 मई से शनि का वक्री होना, भारत के लिए शुभ नहीं कहा जा सकता। कोरोना महामारी से जूझते देश के लिए शनि का वक्री होना ठीक नहीं माना जा सकता। लेकिन, 10 जुलाई को भारत से विष योग समाप्त हो रहा है, उसके बाद इस महामारी से कुछ राहत मिलेगी।
    स्वतंत्र भारत का जन्म 15 अगस्त 1947 को रात्रि 00 बजे दिल्ली में वृषभ लग्न में कर्क राशि में हुआ था। वृषभ लग्न के कारण भारत शांतिप्रिय और सबको साथ लेकर चलने वाला, मेहनती, आसानी से मित्र बनाने वाला और कई संकट झेलने वाला देश है। देखते हैं कि भारत की जन्म कुंडली वर्तमान समय में क्या कहती है और इस संकट से निकलकर भारत कब कब अच्छे समय में प्रवेश करेगा।
भारत की जन्म कुंडली के केंद्र में वृषभ लग्न में वृष का राहु व लग्न से सातवें भाव में केतु के मध्य, दूसरे भाव में मंगल, तीसरे भाव में सूर्य-बुध-चन्द्र-शुक्र-शनि और छठे भाव में गुरू की उपस्थिति स्पष्ट रूप से कालसर्प योग का निर्माण करती है। जन्म कुंडली में राहू और केतु के मध्य जब समस्त गृह आ जाते हैं, तब इस योग का निमार्ण होता है। ये योग 12 भावों में 12 प्रकार के होते हैं। स्वतंत्र भारत की कुंडली में लग्न से सातवें भाव के मध्य इस योग का निर्माण हो रहा है.
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जिसे ज्योतिष विज्ञान में अनंत कालसर्प योग कहा गया है। इस योग को दुर्भाग्यशाली योग की संज्ञा भी दी जा सकती है। इस योग के कारण अनेक प्रकार के कष्टों का सामना करना पडता है। जितने भी प्रयास करते जाएं, लेकिन सफलता भी असफलता प्रतीत होने लगती हैं। इस योग के कारण भ्रष्टाचार, अराजकता, बेईमानी चरम पर होती है। दोस्त दगा करता है, अविश्वास की भावना पैदा होती है। देश के विकास की गति धीमी होती है। देश के राजा या उच्च आसन पर बैठे व्यक्तियों के दामन पर भी दाग लगता है। देश की जनता भी अपने आपको ठगा सा महसूस करती है।
महामारी से अभी मुक्ति नहीं  
   स्वतंत्र भारत की जन्म कुंडली में वर्तमान में विद्यमान कालसर्प योग के साथ ही वर्तमान में चन्द्र की दशा में शनि की अंतर्दशा चल रही है। यह एक विष योग है। इस योग की दशा 11/12/2019 से 10/07/2021 तक चलेगी। फ़िलहाल देश विष योग के जंजाल में उलझा हुआ है। विष योग के साथ ही शनि देव 23 मई से 11 अक्टूबर तक उल्टी चाल चलेंगे, यह भी अच्छा संकेत नहीं है। वर्तमान महामारी से राहत मिलने की जल्दी उम्मीद नहीं है। अपितु, इसका विस्तार हो सकता है। साथ ही सरकार को भी जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ सकता है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में केतु की महादशा चल रही हो अथवा शनि की स्थिति ठीक नहीं हो, उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव हो सकता है। धनु, मकर, कुंभ, मिथुन, तुला राशि वाले विशेष रूप से सावधानी रखें।
    भारत के लिए सुखद खबर यह हो सकती है कि चन्द्र की दशा में शनि का अंतर जिससे बिष योग का निर्माण हुआ था और इस योग में भारत ने अत्यधिक कष्टों का सामना किया, यह दोष 10 जुलाई 2021 को समाप्त हो जाएगा। इस दोष की समाप्ति के बाद भारत को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
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(लेखक वकील और ज्योतिष विज्ञान के जानकार हैं)  
संपर्क : 98930 66604 
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