“सेल्यूट” है इनको “आप” भी करना चाहेंगे जो खुद भूखे रहते हैं ताकि ! ……. 

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लोकल इंदौर।   ये वो लोग है जिनका इस कोरोना की महामारी में कहीं  जिक्र  नहीं होगा।  लेकिन ये कोरोना की इस लड़ाई में वे महान योद्धा है जिनके प्रयास अहम है।  ये दिन रात अपने काम में जुटे हैं।  ये केवल खुद भोजन इस लिए नहीं करते कि इन्हें  खाना नहीं मिल रहा बल्कि ये दूसरों  के लिए खुद भूखे रहते हैं।   

आज हम उन लोगों को सलाम पेश कर रहे है जो इंदौर में ऑक्सीजन  की नियमित सप्लाय बनी रहे उसके लिए जामनगर और  अन्य स्थानों से ऑक्सीजन  के भरे हुए टैंकर  इंदौर ला रहे है।   30 टन  आक्सीजन से भरे टेंकर को लगातार 700  किलोमीटर  लाना जोखिम का काम है।   ये  ऑक्सीजन  टेंकर लाने वाले चालक बस इसलिए खाना नहीं खाते कि  उन्हें खाना खाने के बाद कहीं  नींद  न आ जाय और उनके खाने के समय के कारण कहीं  देर न हो जाए उन लोगों को, जिनकी जिंदगी वे अपने साथ ला रहे है। 

संभाग के हजारों कोरोनो मरीजों के लिए प्राणवायु लाने में जुटे टैंकर चालकों ने अब रास्ते में भर पेट भोजन करना बंद कर दिया है। जामनगर से इंदौर के बीच के करीब 700 किलोमीटर के सफर में लगने वाले 20 घंटे से अधिक समय यह ड्रायवर आधा पेट भोजन कर पूरा कर रहे हैं। ताकि मरीजों को समय पर आक्सीजन मिल सके।

आदित्य मिश्रा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास एक गांव के रहने वाले हैं। सालों से मध्य प्रदेश की कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। प्रदेश में आक्सीजन लाने में लगे भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान में अब तक कई बार जामनगर जा चुके हैं। आदित्य बताते है वहां पहुंचने के बाद तेजी से काम करना होता है। एयरपोर्ट से बाहर निकल तत्काल रिफायनरी में जाकर लाइन में लगना होता है। वहां पर कंडक्टर को आने की अनुमति नहीं है, तो खुद ही यह काम करते हैं। गाड़ी भरते ही सबसे पहले इंदौर के लिए निकलते हैं। खाना खाकर नींद आने की आशंका होती है। इसलिए किसी ढाबे पर केवल चाय या हल्का फुल्का नाश्ता कर गाडी़ चलाते हैं। यहां पर जब प्लांट पर आते हैं तो कंपनी वाले पहले से खाना बुलवा कर रखते हैं। यहीं पर कुछ घंटे की नींद मिल जाती है। फिर अधिकारी के आदेश पर विमान से या सडक मार्ग से जाम नगर के लिए निकल जाते हैं

आदित्य की तरह ही राजीव कुमार राव भी आक्सीजन का टैंकर चलाते हैं। कोरोना की दूसरी लहर के आने के बाद जब अचानक से आक्सीजन की कमी हुई तो वे आक्सीजन की सप्लाई में जुट गए। गुजरात से आक्सीजन का टैंकर लेकर इंदौर और भोपाल में खाली कर रहे हैं। राजीव ने बताया कि 30 टन भरी गाडी को चलाने में विशेष सावधानी बरतनी होती है। इस कैप्सूल की कीमत ही 1 करोड़ तक होती है। उतार चढाव या लंबा मोड़ आने पर गाड़ी झोल मारती है। इसलिए विशेष ध्यान रखना होता हैं। इसका वाल्व भी 1 लाख रुपये तक का होता है। उसे खोलने में सबसे अधिक सावधानी रखनी होती है। गाड़ी की अधिकतम गति की 40 से 50 किलोमीटर सेट होती है। लेकिन इससे ज्यादा पर इसे ले जाने पर कभी सोचा ही नहीं है। अहमदाबाद से इंदौर की दूरी को तय करने में 13 घंटे तक का समय लग जाता है। जबकि अभी लाकडाउन के कारण सड़कें खाली हैं।

डी को चलाने में विशेष सावधानी बरतनी होती है। इस कैप्सूल की कीमत ही 1 करोड़ तक होती है। उतार चढाव या लंबा मोड़ आने पर गाड़ी झोल मारती है। इसलिए विशेष ध्यान रखना होता हैं। इसका वाल्व भी 1 लाख रुपये तक का होता है। उसे खोलने में सबसे अधिक सावधानी रखनी होती है। गाड़ी की अधिकतम गति की 40 से 50 किलोमीटर सेट होती है। लेकिन इससे ज्यादा पर इसे ले जाने पर कभी सोचा ही नहीं है। अहमदाबाद से इंदौर की दूरी को तय करने में 13 घंटे तक का समय लग जाता है। जबकि अभी लाकडाउन के कारण सड़कें खाली हैं।

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