देश के मूक बधिर भी अब सांकेतिक भाषा में कह सकेंगे “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे”

इंदौर की आनंद सर्विस सोसाइटी के  ज्ञानेंद्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित ने किया सांकेतिक भाषा में तैयार

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लोकल इंदौर 23 सितम्बर l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में की जाने वाली प्रार्थना ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ को  देश भर के देश में 78 लाख मूक-बधिर दिव्यांग भी  अब संकेत भाषा (साइन लैंग्वेज) में प्रस्तुत  कर  सकेंगे l इस हेतु
इंदौर की आनंद सर्विस सोसाइटी ने संकेत भाषा (साइन लैंग्वेज) में रूपांतरित किया है।सोसायटी के  ज्ञानेंद्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित ने करीब 6 दिन में 3 मिनट 46 सेकंड के वीडियो को तैयार किया है। ये वीडियो  राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत के हाथों विमोचित करवाया गया l
आज है  विश्व सांकेतिक भाषा दिवस

इसके पहले भी पुरोहित दंपति ने वर्ष 2003 में राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय गान को भी सांकेतिक भाषा में प्रस्तुत किया था, जिसे तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने मान्यता दिलाई थी।

राष्ट्र के गुणगान की प्रार्थना को दिव्यांगों के लिए बनाने का कारण बताया कि जब भी राष्ट्र की बात होती है। हम सब देश में विकास, सुख, चैन, शांति और धर्म-सद्कर्म की विजय की कामना करते हैं। यही भाव दिव्यांगों के मन भी आते हैं। वे इस भावना को अभिव्यक्त कर सकें इसलिए हमने प्रार्थना को सांकेतिक भाषा में तैयार करने का निश्चय किया। गौरतलब है कि देश में 78 लाख मूक-बधिर दिव्यांग है।
ऐसे मिली प्रेरणा:
ज्ञानेंद्र पुरोहित के बड़े भाई आनंद दिव्यांग थे। विदिशा में घर के पास ही संघ की शाखा लगती थी। तब आनंद, ज्ञानेंद्र से पूछते थे कि शाखा में उपस्थित लोग क्या कहना चाहते हैं। तब उनको प्रार्थना का भाव समझाना कठिन था, लेकिन यह बात भाई के दिवंगत होने के बाद भी ज्ञानेंद्र को याद रही। वे और मोनिका घर में यह प्रार्थना गाते थे। इसके साथ ही उन्होंने सोसाइटी के बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा में प्रार्थना तैयार की। अब बच्चे भी यह प्रार्थना करते हैं।
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