मनुष्य शरीर ईश्वर की अमानत है :हम इसे ट्रस्टी के रूप में संभाले …पुष्पा दीदी

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लोकल इंदौर, 16सितम्बर । हमें ईश्वर ने विश्व सेवा के लिये कर्म स्थल पर भेजा है यह शरीर भी ईश्वर की दी हुई अमानत है इसे ट्रस्टी भाव ( न्यासी भाव ) से संभालना है और सदा श्रेष्ठ कर्म करना है। निमित्त भाव से की गई सेवा अभिमान रुपी आधीनता से दूर रखता है। नम्रता लाती है ।
उक्त उद्गार ज्ञानशिखर ओमशान्ति भवन के ओमप्रकाश भाईजी सभागृह में चल रहे 2दिवसीय कार्यक्रम ”हम बदलेंगे -एक आंतरिक परिवर्तन यात्रा” के अन्तर्गत दिल्ली से पधारी राजयोगिनी पुष्पा दीदी ने व्यक्त किये ।
आपने ब्रह्माकुमारी संस्थान के फाउन्डर पिताश्री ब्रह्मा बाबा का उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रह्मा बाबा के तन में शिव परमात्मा की प्रवेशता होने पर स्वयं को विश्व सेवा के लिए निमित्त सेवाधारी समझकर आजीवन सेवाएं की  अपने एक एक कर्म से अनेक आत्माओं को श्रेष्ठ कर्म करने की प्रेरणाएं दी ।

ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी ने संध्याकालिन सत्र में साइलेन्स पावर के बारे में बताते हुए कहा कि शांति एक गुण है, शांति एक महान शक्ति है। शांति की शक्ति हमे धैर्यवान बनाती है। शांति हरेक आत्मा का निजी स्वाभाव है। शांति हमारा स्वधर्म है। हम मेडिटेशन के द्वारा मन की शांत अवस्था का अनुभव करते हैं तो इससे शांति का प्रभाव विश्व मे चारो ओर प्रकम्पन्न के रुप में वातावरण में खूशबू की तरह फैलता है और आत्मा एक अद्भूत उर्जा से भरपूर हो जाती हैै। जिससे हम अपने अंदर कोई भी परिवर्तन सहज कर लेते हैं और जीवन में सफलता रुपी लक्ष्य को हासिल कर लेते है। आपने खचाखच भरे हाल में सभी भाई बहनों को शांति की गहन अनुभूति कराई । इंदौर झोन के मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक हेमलता दीदी ने पुष्पा दीदी का आभार माना।

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