“वायसराय” थे तब अब नेता वायरस हो गए…. गुस्ताखी माफ़ में नवनीत शुक्ला

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वायसरायÓ थे तब अब नेता वायरस हो गए….
जिनकी रोटी-रोजगार राजनीति है, जो कोरोना महामारी के दौरान शहर के ‘वायसरायÓ बनकर इस शहर को खुलवाने के लिए गिर-गिर पड़ रहे थे, ऐसे तमाम राजनेता जो ताली और थाली बजाने के बाद अब जब शहर भयावह बीमारी के आगोश में आ गया है, तो अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का काम करने में शर्म नहीं कर रहे हैं। कार्यकर्ता को भ्रम जाल में इस कदर उलझा रखा है, कि वह सेना के जवान की तरह अपना जीवन देने को तैयार हो गया है। जबकि राजनेताओं को सबसे पहले अपने कार्यकर्ता को कोविड यानी कोरोना मरीज की स्थिति दिखाना चाहिए कि वह अस्पताल में किस प्रकार जीवन बचाने लिए संघर्ष कर रहा है। परिवार के लोग अपनी कड़ी मेहनत की कमाई उसे बचाने पर कैसे खर्च कर रहे हैं, यह भी दिखाना चाहिए। इसके बाद जिन घरों में कोरोना के कारण मृत्यु हो चुकी है, उन घरों पर भी जरूर कार्यकर्ता को भेजना चाहिए। ताकि उसे पता चले कि उसके बीमार होने के बाद जिसे वह नेता मान रहा है, क्या वह उसके लिए समर्पित रहेगा? शहर में कानून के दो तरह के मापदंड स्थापित हो चुके हैं। पहली वह जिसमें एक जमात पर रासुका हो रही है, दूसरा वह जिसे राजनीति के लिए जगह दी जा रही है। शहर के अनलाक होने के बाद अब शहर इस महामारी की भयावह स्थिति के करीब पहुंच चुका है। राजनेता खुद की रोटी सेंक रहे हैं, उन्हें मरने वालों से कोई लेना-देना नहीं है। तो दूसरी ओर जिला प्रशासन पलंगों की व्यवस्था में दिन-रात लगा हुआ है। वहीं शहर जो व्यापार और व्यापारी के सम्मान के लिए जाना जाता है, अब इस शहर का व्यापारी और कारोबारी शहर को बीमारी से बचाने के लिए खुद ही पीछे खसकने लगा है। यानी अपनी ओर से ही लाकडाउन कर लोगों को बचाने की जुगत कर रहा है। शहर के कई क्षेत्रों में व्यापारियों ने अपनी दुकानें जरूरत होने पर ही खोलने का निर्णय लिया है। राम की तरह शहर के बाशिंदों के लिए जो नेता शहर खोलने को मरे जा रहे थे, अब वे लोगों की नजरों में रावण बनने लगे हैं। अब केवल इन नेताओं को उन कंधों की तलाश है, चाहे वह धर्म के नाम पर लाशों पर चढ़कर ही उन्हें उनके पद पर स्थापित कर दे। सांवेर की हालत तो और खराब है, यहां पर रावण से राम बने नेता इन दिनों इस बात की चिंता नहीं कर रहे हैं कि कितने लोग बीमार हो रहे हैं? वे इस बातकी चिंता कर रहे हैं कि गंगा की तरह पवित्र नदी में पहुंचने के बाद पाप की कमाई को पुण्य में लगाकर वे अपना यह जनम एक बार फिर सुधार ले। इस शहर के नागरिकों से हम इस कालम के माध्यम से विनम्र अपील करना चाहते हैं कि यदि उन्हें कोरोना नहीं हुआ है तो वह भाग्यशाली है।
राजनीति रोजी रोटी है उनकी, दरवाजे पर बीमारी खड़ी है आपके…
और यदि उन्हें कोरोना की मरीज की स्थिति देखना है तो एक झलक जाकर देख ले, ताकि उन्हें जीवन-मृत्यु का महत्व पता लग जाएगा। डाक्टर भी कह रहे हैं कि लोग प्रारंभिक स्थिति में जांच नहीं करवा रहे हैं और जब तक वह अस्पताल पहुंच रहे हैं, हालात बिगड़ चुके रहते हैं। अस्पतालों के पलंग भर चुके हैं। इसलिए अपने घर पर अपने आप को और अपने परिवार को बचाने में ध्यान दे या फिर घर में पांच लाख से ऊपर नकद हो तो ही इस बीमारी से दो-दो हाथ करने की इच्छा रखे। इसके बाद भी जीवन की गारंटी नहीं है। जो आंकड़े मृत्यु के सामने है, वे बता रहे हैं कि हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। ऐसे में हमारा उन तमाम कार्यकर्ताओं से भी आग्रह है कि अपने परिवार की हालत को जरूर देख समझ लें। अन्यथा कोई नहीं आएगा, सरकार भी इस समय पूरी तरह से आर्थिक बर्बादी की जकड़ में आ गई है। हर क्षेत्र में तेजी से फैल रही बीमारी आपको न लगे इसके लिए सचेत हो जाइए। एक नजर में यह देख लीजिए कि पिछले 7 दिनों में ही हर क्षेत्र में किस प्रकार मरीजों की संख्या आग की तरह फैली है।
इंदौर शहर के कोरोना संक्रमित टॉप-10 इलाके
सुखलिया 348, खजराना 333, मालवा मिल 307, सुदामा नगर 254, विजय नगर 198, मल्हारगंज 186, परदेशीपुरा 167, नेहरू नगर 300, जूनी इंदौर 134, स्कीम 71 में 133, नंदा नगर 132, स्कीम 78 में 132, मूसाखेड़ी 131, राजमोहल्ला 129, भागीरथपुरा 120, छावनी 117, एयरपोर्ट रोड 105, जूना रिसाला, सदर बाजार 103, स्कीम 54 में 100, चंदन नगर सेक्टर 71 में 98 अत: हमारा आग्रह है कि किसी भी प्रकार के भ्रम-जाल या राजनीतिक जाल में उलझकर अपने और अपने परिवार को इस महामारी में उलझाने से बेहतर है कि सतर्क रहे, मास्क पहने, भीड़ से और नेताओं से दूर रहे, साथ ही दूरी बनाकर रहे। 
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