त्रिपुरा : 51 साल के युवा CM को हटाकर बीजेपी ने 69 साल के डेंटिस्ट को CM क्यों बनाया

एक तरफ भाजपा के नीति नियंता 70 साल की उम्र वाले नेताओं को घर भेजने की मुहिम चला रहें है दूसरी तरफ BJP आलाकमान ने 51 साल के युवा को हटाकर 69 साल के व्यक्ति को cm बना दिया है। क्या बीजेपी के बुजुर्ग योद्धाओं के अच्छे दिन आने वाले है ? Subodh Khandelwal

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इंदौर। मोदी शाह जो करें वो कम है। शनिवार को 4 बजे इन दोनों ने फिर से एक राजनीतिक धमाका कर दिया। धमाका भी ऐसा जिसकी किसी को कानो-कान खबर ही नहीं हुई। वैसे भी ये लोग जब धमाका करते है तो किसी को खबर नहीं होती। आज एक झटके में बीजेपी ने उत्तर पूर्व के छोटे से राज्य त्रिपुरा के युवा और डायनेमिक CM बिप्लव देव को हटा दिया और उनकी जगह त्रिपुरा बीजेपी के अध्यक्ष डॉ माणिक साहा को राज्य का नया मुखिया बना दिया।

पुराने ने इस्तीफा दे दिया और आजकल में नए मुख्यमंत्री शपथ भी ले लेंगे। पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार बीजेपी ने अचानक बिप्लव जैसे युवा और डायनेमिक नेता को CM की कुर्सी से हटाकर 69 साल के एक बुजुर्ग को ये जिम्मेदारी क्यों दी ??

मुख्यमंत्री के रूप में बिप्लव का प्रदर्शन  शानदार था, नगरीय निकाय के चुनाव में उन्होंने भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलवाई थी। वे हरियाणा के खट्टर से तो कई गुना बेहतर थे। उम्र का समीकरण भी उनके पक्ष में था।

उन्हें योगी आदित्यनाथ, हिमंता विश्वशर्मा के साथ भाजपा  के उन नेताओं में से माना जाता था जिन्हे पार्टी भविष्य के लिए तैयार कर रही है। इससे बड़ी बात ये कि त्रिपुरा में अगले साल यानी फरवरी 2023 में विधानसभा चुनाव है।फिर अचानक उन्हें कुर्सी से क्यों हटाया गया ये सवाल भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक समीक्षकों के जेहन में भी  घूम रहा है।

सवाल ये भी है कि यदि डॉ माणिक साहा को CM बनाना था तो फिर उन्हें महीने भर पहले राजयसभा में क्यों भेजा ? उस समय उन्हें राज्यसभा में भेजने का फैसला गलत था या अभी CM बनाने का ?

एक तरफ भाजपा के नीति नियंता 70 साल की उम्र वाले नेताओं को घर भेजने की मुहिम चला रहें है और दूसरी तरफ भाजपा आलाकमान 51 साल के युवा को हटाकर 69 साल के व्यक्ति को उस राज्य की कमान दे देता है जिसने 70 साल के इतिहास में पहली बार भाजपा को भर पल्ले समर्थन दिया था। अब सवाल ये है कि क्या इस फैसले के बाद एमपी के कुछ नेताओं को उम्र के आधार पर घर बैठाने वाले राजनीतिक योद्धाओं की मुहिम थमेगी या #बुलडोजर चलकर रहेगा ?

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