क्या CM शिवराज अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे ! ज्योतिष अजय शर्मा का आंकलन

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का जन्म 5 मार्च 1959 को दोपहर 12 बजे सिहोर में हुआ था। 1990 में वे पहली बार विधायक बनें! शिवराजसिंह का सफर का राजनीतिक सफर निरंतर जारी रहा। विधायक बनने के कुछ ही समय बाद वे विदिशा से सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 1996, 1998 मेें उन्हें पुनः सांसद बनने का मौका मिला। उनका सफर भी चलता रहा और राजनीतिक कद भी बढ़ता गया। प्रदेश में भाजपा के बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद 2008 में पहली बार उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। वे 2008 से 2013 फिर 2013 से 2018 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2018 में उन्हें पार्टी की हार के बाद मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा! लेकिन, कांग्रेस में विद्रोह के बाद पार्टी ने शिवराजसिंह को 23 मार्च 2020 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद सौंपा।
  शिवराजसिंह का जन्म वृषभ लग्न में होने के कारण वे शांतिप्रिय, सबको साथ लेकर चलने वाले मेहनती इंसान हैं। वे आसानी से मित्र बनाने वाले, अनेक प्रताड़ना झेलकर भी विचलित न होने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा संघर्ष किया और आसानी से किसी के भी विश्वास में आए। इन सारी विशेषताओं ने उन्हें सफल राजनीतिकार के साथ चतुर स्वभाव भी दिया जो संघर्ष का अंत नजर आते ही बड़ी समझदारी और सूझबूझ से रास्ता बनाने में कामयाब होता है।
  उनकी कुंडली के 11वें आय भाव का शुक्र अपनी उच्च राशि मीन का होने और बुध का साथ होने से लक्ष्मीनारायण योग का निर्माण करता है, जो एक तरह से राजयोग है। परंतु, बुध मीन राशि में नीच का होने के कारण नीच भंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। इस योग के कारण ही उन्होंने संघर्ष से सफलता और उन्नति प्राप्त की है। महानायक अमिताभ बच्चन, शरद पंवार, सचिन तेंदुलकर सहित कई ऐसी हस्तियां हैं जिनकी कुंडली में यही योग उपस्थित है। कुंडली में नीचभंग राजयोग ही सफलता का ये आयाम निर्मित करता है। इस योग के कारण बहुत ज्यादा ऊर्जा और शक्ति प्राप्त होती है। इस राजयोग से ही शिवराजसिंह 10वें भाव में सूर्य की उपस्थिति से मुख्यमंत्री पद पर पहुंचे हैं। पद के साथ अपनी ऊर्जा, शक्ति, वाकपटुता और तीव्रता से अपने मनोभाओं को प्रकट करने की क्षमता भी उन्हें मिली। इसी युति के कारण वे लोगों के मध्य आसानी से संवाद करते हैं और रैली को सम्बोधित करते हैं।
–   लाभ भाव में बुध होने के कारण शिवराजसिंह में चतुर चालाक परिस्थितियों का निर्माण होता है और वे माहौल को भांप लेने की क्षमता रखते हैं। उसी के अनुसार भविष्य के आयोजनों का निर्धारण भी होता है। इसी कारण वे पार्टी में विपरीत परिस्थितियों के बाद सिरमौर रहते हैं।
–  शिवराजसिंह की कुंडली में अनेक राजयोग हैं, जिसके कारण वे जनप्रतिनिधि के तौर पर पार्टी के बडे पदों पर रहे। परन्तु, मुख्यमंत्री पद दिलवाने में कर्म भाव में कुंभ राशि के सूर्य ने जो किया वो महत्वपूर्ण है। इसमें वायु राशि की उपस्थिति का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा। लेकिन, इस कारण ‘जैसा सुख वैसा दुख मिलेगा’ इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
– आय भाव में उच्च राशि के शुक्र के प्रभाव से स्त्री / पत्नी व मित्रों के माध्यम से उच्च लाभ व अनायास धन का लाभ होता है।
– केतु के प्रभाव से ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत होता है! लेकिन, जीवन में सबकुछ होने के बाद भी संतुष्टि की कमी होती है।
– लग्न में वृष राशि का मंगल होने के कारण हमेशा अनेक शत्रुओं से घिरा रहना, धार्मिक शत्रुता, दांत-उदर रोग की संभावना बनी रहती है। मंगल की 7वें भाव पर पूर्ण दृष्टि शुभ नहीं होती है और अनेक बिमारियों का संचार करती है।
– शिवराजसिंह की पत्रिका में अनेकों शुभ योग के साथ अशुभ योग व ग्रहों की उपस्थिति भी है। इस कारण पद, पैसा, प्रतिष्ठा और सम्मान होने के बाद भी ऐसे जातक को आत्मसुख नहीं मिलता।
– 5वें भाव में कन्या राशि के राहू की उपस्थित राज्य की और से दंड की और भी इशारा करती है। 8वें भाव में स्थित धनु राशि का शनि मानसिक शांति भंग करता है। इस कारण व्यक्ति कुछ न कुछ अच्छा बुरा सोचना में लगा रहता है। ऐसा व्यक्ति 15 मिनट से ज्यादा शांत नहीं रह सकता! वो कुछ भी करे, पर मन अंदर से बैचेन बना रहता है या कुछ न कुछ चलता रहता है। हांलाकि, 8वें भाव में स्थित शनि कई जगह दुर्घटनाओं से बचाव करता है, लम्बी आयु प्रदान करता है। आय भाव में बुध, शुक्र के साथ केतु चर्म रोग देता है।
वर्तमान समय
   8 मई 2014 से शनि की महादशा प्रारंभ हुई है। शनि के आठवें भाव में स्थित होने से इस महादशा में पद प्रतिष्ठा के साथ चिंता और दुख भी बढ़ता है। वर्तमान में शनि में नीच राशि के बुध की अंतर्दशा के चलते उन्हें 2018 के विधानसभा चुनाव में अपने पद से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन, आय भाव में बैठे केतु के साथ नीच भंग राजयोग का निर्माण कर रहे नीच के बुध के साथ उच्च के शुक्र की उपस्थिति ने शनि की दशा में केतु की अन्तर्दशा व उच्च शुक्र की प्रत्यतंर दशा ने राजयोग की और इशारा किया। इस दशा में केतु की अन्तर्दशा 21 अप्रैल 2020 के बाद सूर्य का प्रत्यंतर आते ही उन्हें मुख्यमंत्री पद पर काबिज कर दिया। सिंह की पत्रिका में 10वें भाव में वायु राशि की उपस्थिति ने ही पूर्व में उन्हें 3 बार मुख्यमंत्री पद पर विराजित करवाया था। एक बार पुनः सूर्य का प्रत्यंतर आते ही उन्हें इस पद पर बैठने का मौका मिला। लेकिन, यह महत्वपूर्ण है कि आगामी समय में शनि की महादशा व केतु की अन्तर्दशा में जूलाई 2020 पुनः परेशानी उत्पन्न करेगा। जनवरी 2021 में बुध की प्रत्यतंर दशा भारी पड़ सकती है! क्योंकि नीच राशि के बुध के अंतर से सिंह को सत्ता से बे-दखल होना पडा था। शनि में बुध का प्रत्यतंर आते ही शिवराजसिंह को पुनः इस तरह के हालात से सामना करना पड़ सकता है।
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(लेखक ज्योतिष, कुंडली विशेषज्ञ हैं)
संपर्क : 9893066604
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