क्या कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौपेंगे प्रदेश अध्यक्ष की कमान ?

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इन दिनों मध्य प्रदेश  कांग्रेस में घमासान मचा है. प्रदेश  पार्टी के नए मुखिया का नाम तय होना है, जो आसान नहीं लग रहा. प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है. ऐसी स्थिति में एक सर्वमान्य पार्टी अध्यक्ष कैसे चुना जाएगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है ? कमलनाथ जब  पार्टी अध्यक्ष चुने गए थे तब हालात अलग थे. प्रदेश में 15 साल से भारतीय जनता पार्टी का राज था  और कांग्रेस किसी भी स्थिति में इससे मुक्ति चाहती थी. जबकि अब हालात अलग हैं प्रदेश में कमलनाथ  के नेतृत्व में  कांग्रेस की सरकार है . कांग्रेस के सारे नेता विपक्ष को भूलकर घर की जंग में व्यस्त हैं .

पार्टी में कमलनाथ को समन्वय में पारंगत माना जाता है और उन्होंने इसी कला से चुनाव जीता सरकार बनाई और बिना कोई समझौता किए सरकार चला रहे  हैं .लेकिन पार्टी अध्यक्ष को लेकर जो  संकट पैदा हुआ है. उसे सुलझाने का कोई रास्ता किसी को नहीं सुझाई दे रहा है. यही कारण है कि पार्टी अध्यक्ष के पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम आते ही कई नेता  विरोध करने लगे हैं .उनके नाम पर विरोध का कारण समझ से परे है .ज्योतिरादित्य सिंधिया की पक्ष में केवल एक ही नकारात्मक बात सामने आ रही है और वह है  कि वे खुद अपनी परंपरागत सीट गुना से लोकसभा का चुनाव हार गए. इसके बाद पार्टी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार सौंपा और वहां भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा, हालांकि अब उन्हें महाराष्ट्र चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाकर संतुष्ट करने की कोशिश की जा रही है, किंतु उन्हें जहां की भी जवाबदारी दी गई वहां नतीजे संतोषजनक नहीं रहे.  लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद पार्टी के अंदर का माहौल बहुत अच्छा नहीं है अध्यक्ष पद के लिए कई नाम सामने आए पर कोई भी पार्टी को इस बात के लिए आश्वस्त नहीं कर सका कि उसके अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में सब कुछ सामान्य हो जाएगा लेकिन विधानसभा में कांग्रेस ने जिस तरह से प्रदर्शन किया था उसके बाद लगने लगा था कि ज्योतिराज सिंधिया को प्रदेश में  मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी जाएगी या फिर उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया जाएगा. लेकिन यह दोनों ही नहीं हो सका और अब जब कांग्रेस का अध्यक्ष चुनने की बारी आई है तो उनके नाम पर कई लोगों को कड़ी आपत्ती जता  रहे  हैं. उनके नाम के साथ ही बाला बच्चन का नाम भी हवा में  है. इससे पहले जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के नाम भी ले गए थे. प्रदेश सरकार में मंत्री  इमरती देवी ने खुलेआम सिंधिया को प्रदेश में पार्टी की कमान सौंपी जाने की मांग कर दी है .वही  कई नेता खुलकर सिंधिया का विरोध भी कर रहे हैं.  हालांकि दिग्विजय सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष के लिए अपने आप को दौड़ से बाहर कर लिया है . अब देखना यह है कि कमलनाथ अपने उत्तराधिकारी के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी किसे सौंपते हैं ? दिग्विजय सिंह पर  के सरकार में हस्तक्षेप के आरोप के बाद क्या कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौपेंगे प्रदेश अध्यक्ष की कमान ?

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