World Cancer Day 2021:होम्योपेथी चिकित्सा से कैंसर के आखिरी स्टेज में भी मिलता है मरीजों को लाभ -डॉ ए.के. द्विवेदी

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प्रायः देखने में आता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ कैंसर की बीमारी भी बढ़ जाती है। रोग की उत्पत्ति का सटीक कारण अभी भी अज्ञात नहीं है। नवयुवकों को कैंसर कम ही देखने सुनने को मिलता है लेकिन गुटखा, तम्बाकू या शराब का सेवन करने वालों को कम उम्र में भी कैंसर हो सकता है। पुरुषों को मुख, जीभ, गला, पेट, आँत या  प्रोस्टेट का कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है। महिलाओं को स्तन (ब्रेस्ट) एवं युटरस तथा ओवरी का कैंसर ज्यादा होता है।

कैंसर के हर स्टेज में होम्योपैथी का बेहतर परिणाम –
गॉल ब्लेडर एवं पैंक्रियाज का कैंसर किसी को भी हो सकता है। इनकी उत्पत्ति मानसिक एवं शारीरिक किसी भी कारण से हो सकती है, दुःख, शोक, चिन्ता, व्यापार में हानि, गहरे आघात, धोखा इत्यादि कोई भी कारक कैंसर का रूप धारण कर सकता है। इस युग में यह सभी कारण प्रमुखता से बढ़ते जा रहें हैं, इसलिए अधिकतर कैंसर के केसेस आ रहे हैं। डाॅ. ए.के. द्विवेदी के अनुसार लोगों को आपाधापी से दूर रहकर शांति का जीवन अपनाना चाहिए, केमिकल युक्त भोज्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। होम्योपैथी इलाज कैंसर के हर स्टेज में बेहतर परिणाम देता है।
 
कैंसर के कई प्रकार हैं –
प्रमुख कैंसरों में मुख और प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों को ज्यादा होता है। वैसे ही ब्रेस्ट और युटरस का कैंसर महिलाओं को होता है, कई बार मरीजों को लगता है कि ऑपरेशन के साथ कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी कराने से बीमारी खत्म हो जाती है, कई लोगों की बीमारी खत्म भी हो जाती है, वहीं कई लोग कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी तथा ऑपरेशन के बाद भी पुनः उसी बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं या शरीर में अन्य जगह कैंसर हो जाता है, तो वो लोग अत्यधिक निराश होकर, बड़ी आश लगाये होम्योपैथिक चिकित्सा के लिए आते हैं और बीमारी के आखिरी स्टेज में भी राहत पाते हैं।
होम्योपैथी है सौम्य चिकित्सकीय तरीका –
डॉ ए.के. द्विवेदी के अनुसार कैंसर के किसी भी स्थिति या बीमारी के आखिरी स्टेज में भी होम्योपैथिक इलाज प्रभावी है। यह चिकित्सा के समरूपता के सिद्धान्त पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियाँ उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में चिकित्सक रोगी द्वारा बताये गये जीवन-इतिहास एवं रोग लक्षणों को सुनकर उसी प्रकार के लक्षणों को उत्पन्न करने वाली औषधि का चुनाव करते हैं। होम्योपैथी एक सुरक्षित और सौम्य चिकित्सकीय तरीका है, जो कई प्रकार की बीमारियों का प्रभावी उपचार कर सकता है। इसकी आदत नहीं पड़ती है। अर्थात् रोगी को होम्योपैथी दवाओं की लत नहीं लगती है। यह गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सभी के लिये सुरक्षित है।

केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के सदस्य डाॅ. ए.के. द्विवेदी का कहना है कि, रोग लक्षण एवं औषधि लक्षण में जितनी ही अधिक समानता होगी, रोगी के स्वस्थ होने की संभावना भी उतनी ही अधिक रहती है। पुराने और कठिन रोग की चिकित्सा के लिए रोगी और चिकित्सक दोनों के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। वर्षों से जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीज जो अन्य चिकित्सा प्रणाली से इलाज कराकर थक जाने के बाद आश लगाये होम्योपैथी इलाज कराने आते हैं, तब तक देर हो चुकी होती है और कैंसर अत्यधिक फैल जाता है। परिणामतः मरीज का पूरी तरह ठीक होना मुश्किल हो जाता है, ऐसी स्थिति में होम्योपैथी दवा बतौर पैलिएटिव ट्रीटमेंट दे सकते हैं। आज भी कैंसर का सम्पूर्ण इलाज सम्भव नहीं हो सका है फिर भी, होम्योपैथी इलाज द्वारा कैंसर को बढ़ने, फैलने या बार-बार होने से काफी हद तक रोका जा सकता है।

1 COMMENT

  1. Ak Dwivedi chor he har bar dawaiyo ke milake 10000 har month le leta he baki delhi me bhi 800 rupye me kalyan Bannerjee jese padmshri doctor ilaj kr dete he

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