इंदौर के विकास की चिंता या दिखावे की राजनीति!

शहर के हर विकास के लिए सांसद और मंत्री अपने-अपने तरीके से लगे हैं। अब ये दोनों नेता देश और प्रदेश की राजधानी में शहर की योजनाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं! ...

0
293
(श्याम यादव) आजकल इंदौर की राजनीति में दो लोग जबरदस्त तरीके से अपने नंबर बढ़ाने में लगे हुए हैं। एक हैं सांसद शंकर लालवानी और दूसरे प्रदेश सरकार में मंत्री तुलसी सिलावट। इन दोनों ने इंदौर भाजपा के सभी नेताओं और विधायकों को पीछे छोड़ दिया। इनकी अतिसक्रियता या दिखावे की राजनीति से लगता है कि बाकी सभी नेता नाकारा हैं। पिछले करीब एक साल से वे  सारे प्रशासनिक बयान और फैसले लेते दिखाई दे रहे हैं। कोरोना महामारी के प्रकोप को इंदौर में कम करने का श्रेय भी इन्हीं दोनों नेताओं ने लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी! लेकिन, कई बार ऐसा भी लगा कि दोनों ही नेता सक्रियता में आपसी प्रतिद्वंदिता करते दिखाई दे रहे हैं। कई बार ऐसी स्थिति भी आई कि एक ही मुद्दे पर दोनों बयानों में सामंजस्य दिखाई नहीं दिया। पिछले दिनों ये दोनों नेता इंदौर से बाहर थे! लेकिन, इंदौर की चिंता करना उन्होंने वहां भी नहीं छोड़ी! सांसद दिल्ली में तो मंत्री भोपाल में मंत्रियों से गुहार लगाते दिखाई दिए!
   सांसद शंकर लालवानी लोकसभा की बैठकों में भाग लेने दिल्ली गए, तो केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर इंदौर के विकास  कर रहे हैं। ये अपनी जगह ठीक भी है और उनका दायित्व भी है। पर, कुछ मामलों में उनकी बातें इंदौर की जनता को भरवाने वाली लगती है। रेलमंत्री से मिलकर वे इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के लिए ज्यादा फंड की मांग करते हैं। इंदौर-उज्जैन लाइन के दोहरीकरण की बात उठाते हैं और कई दूसरी योजनाओं पर बात करते हैं!
इसी को लेकर  उनका एक   वीडियो इंदौर में वायरल  हो जाता है या करवा दिया जाता है l  ताकि जनता खुश हो, कि उनका प्रतिनिधि उनके हक़ के लिए अलख जगा रहा है!
 देखे वायरल वीडियो 

लेकिन, मसला ये कि रेल परियोजना पर मांगे सांसद को बजट से पहले उठाना थी तो कोई निष्कर्ष निकलता! अब ये सारी चिट्ठी-पत्री कोई मायने नहीं रखती।
   कुछ ऐसा ही अंदाज तुलसी सिलावट का भी है। वे जब तक इंदौर के प्रभारी रहे, ऐसा लगा कि वही इंदौर में भाजपा को संभाल रहे हैं! प्रशासन और भाजपा के सभी नेताओं को उन्होंने हाशिए पर बैठा दिया था! हर बैठक में सुझाव, निर्देश और फीडबैक लेते वे ही दिखाई देते थे। जनसम्पर्क की  सरकारी विज्ञप्तियों में भी उनका जमकर प्रचार किया गया! अब, जबकि उन्हें ग्वालियर और हरदा की जिम्मेदारी सौंपी गई, इंदौर से उनका मोहभंग नहीं हुआ। वे नए राज्यपाल को आमंत्रण भी देते हैं तो इंदौर आने का! एमवाय हॉस्पिटल को लेकर वे इतना चिंतित है, जैसे एक रात में कायापलट कर देंगे! इन दिनों वे भोपाल में हैं, तो मंत्रियों को इंदौर की योजनाओं के लिए पत्र बांट रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर सम्बंधित मंत्री को उन्होंने लम्बा पत्र दिया और शहर को स्मार्ट बनाने के लिए लिए ज्यादा फंड की मांग की! इसी तरह वे इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर चिंतित दिखाई दिए। मंत्री ने भी 15 अगस्त से काम में गति लाने के निर्देश दिए! लेकिन, उस भूकंप झोन के मुद्दे को लेकर कोई बात नहीं कर रहा, जिसके सामने आने के बाद काम बंद हुआ था।
    इन दोनों नेताओं को देखकर लग रहा है कि अभी तक इंदौर का विकास ही नहीं हुआ था! क्योंकि, इस शहर का कोई माई-बाप ही नहीं था! पहली बार दो ऐसे नेता सामने आए, जिन्होंने इस शहर को समझा और यहाँ की जनता के उत्थान के लिए सक्रियता दिखाई! महामारी से मुक्ति से लगाकर शहर के हर विकास के लिए सांसद और मंत्री अपने-अपने तरीके से लगे हैं। अब ये दोनों नेता देश और प्रदेश की राजधानी में शहर की योजनाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं! कभी पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन के बारे में कहा जाता था, कि वे केंद्रीय मंत्रियों को चिट्ठी लिखने के अलावा कुछ नहीं करती! अब शायद उन लोगों को ऐसे दो जुझारू नेताओं के कामकाज से कोई शिकायत नहीं होगी! अब ये दिखावे की महज राजनीति है या वास्तव में इंदौर चिंता की जा रही है, ये फैसला इंदौर की जनता करे!
लोकल इंदौर का एप गूगल से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें... 👇 Get it on Google Play

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here